कबीर चबूतरा से जबलपुर की ओर 50 फीट चौड़ी होगी अमरकंटक सड़क

जबलपुर से अमरकंटक बिलासपुर सड़क का हाईवे के रूप में विस्तार तो मान लिया गया है पर इसका निर्माण फोरलेन के रूप में न होकर 50 फीट चौड़ा ही होगा। जबलपुर से अमरकंटक और फिर उसके नजदीक कबीर चबूतरा तक 220 किलोमीटर के दायरे में 50 फीट चौड़ी सड़क बनना है। पहले हिस्से के रूप में केन्द्र सरकार ने 45 किलोमीटर के हिस्से में निर्माण की अनुमति दी है। इसके लिए टेण्डर की प्रक्रिया अगस्त माह में पूरी की जाएगी। कबीर चबूतरा से सागर टोला तक यह विस्तार होगा उसके बाद सागर टोला से डिण्डौरी, शहपुरा, कुण्डम और खमरिया तक यह सड़क बनना है। इसमें विशेष बात यह है कि खमरिया और कुण्डम में इसी सड़क पर बायपास भी बनाया जाना है। इसके लिए सरकारी, निजी और वन भूमि चाहिए होगी जिसके अधिग्रहण के लिए प्रक्रिया आरंभ कर दी गई है। लोक निर्माण एनएच के अधिकारियों के अनुसार सागर टोला से डिण्डौरी, शहपुरा, कुण्डम एरिया में सड़क चौड़ीकरण के लिए जो भूमि चाहिए होगी उसके लिए अधिग्रहण किया जाना है।
रास्ते में कितने पेड़ काटे जाने हैं, कितनी भूमि 50 फीट सड़क निर्माण में चाहिए होगी इसका आकलन िकया जा रहा था लेकिन लॉकडाउन में यह प्रक्रिया धीमी हो गई जिसे अब जल्द तेज िकया जाएगा।45 किलोमीटर का हिस्सा बन जाने के बाद बचे हुये 175 किलोमीटर के एरिया को भी अलग-अलग पार्ट में बनाया जाना है। लोक िनर्माण एनएच के ईई विजय खण्डेलवाल के अनुसार जो पहले हिस्से का िनर्माण है वह टेण्डर प्रक्रिया पूरी होते ही चालू कर दिया जाएगा। इसको लेकर संभव है कि अगस्त माह के अंत तक पूरी प्रक्रिया अपना ली जाए।

सड़क सपाट परेशानी अंधे मोड़ों से| जबलपुर से अमरकंटक मार्ग में सड़क खराब है यह समस्या नहीं है लेकिन इसके अंधे मोड़ हैं जो असल परेशानी पैदा करते हैं। अभी जबलपुर से जैसे ही रांझी सड़क खत्म होती है तो खमरिया से आगे जो मोड़ शुरू हाेते हैं तो वाहन को किसी भी तरह से गति नहीं मिल पाती है। सड़क 20 फीट के करीब है पर इसमें चलने के दौरान वाहन तेज गति से नहीं चल पाते हैं। हर पहाड़ और ढलान वाले एरिया में वाहन चालक को रुक रुककर चलना पड़ता है। इन मोड़ों को नई सड़क बनने पर ही खत्म किया जा सकता है। लोक निर्माण एनएच के अधिकारियों के अनुसार सड़क भले ही फोरलेन न बने पर 50 फीट विस्तार में भी पूरे मोड़ों को खत्म कर सड़क को सीधा कर दिया जाएगा।
3 से 4 साल लगेंगे

220 किलोमीटर की इस सड़क को संभावना है कि अलग-अलग हिस्सों में 3 से 4 सालों में पूरा कर लिया जाएगा। ज्यादा समय लगने की संभावना यही बताई जा रही है कि बीच के हिस्से में वन की भूमि ज्यादा है जिसमें निर्माण अनुमति को लेकर लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। पहली खेप में पहला हिस्सा उस ओर स्वीकृत किया गया है जहाँ पर भूमि को लेकर कोई खास पेंच नहीं है। जबलपुर के हिस्से में वन ज्यादा है इसलिए इस मार्ग में प्रक्रिया लंबी होगी।



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