8 लाख रुपए लेकर जिस जमीन का साैदा एक व्यक्ति से किया, उसी पर प्लाॅट काट कर दूसराें की करवा दी रजिस्ट्री
माफिया पर कार्रवाई के दावे किए जा रहे हैं लेकिन साफ-साफ धाेखाधड़ी हाेने के सारे दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद भी पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है। ऐसा ही एक मामला है उज्जैन राेड स्थित विद्या श्री काॅलाेनी का। इस काॅलाेनी की जमीन के एक हिस्से का काॅलाेनाइजर ने एक व्यक्ति से 10 लाख में कृषि भूमि के रूप में विक्रय का साैदा किया। 8 लाख रुपए ले भी लिए। इसी जमीन पर प्लाॅट काट कर दूसरे लाेगाें के पक्ष में रजिस्ट्री भी करवा दी।
धाेखाधड़ी के दस्तावेज प्रस्तुत करने के बाद भी पुलिस यह कह कर कार्रवाई से बच रही है कि मामला काेर्ट में है। हकीकत यह है कि काेर्ट का फैसला जमीन की मालिकी काे लेकर हाेना है। धाेखाधड़ी जाे हाे चुकी है, उसके संबंध में कार्रवाई करने में काेर्ट की प्रक्रिया की काेई बाधा नहीं है लेकिन इसकी अाड़ लेकर पुलिस कार्रवाई नहीं कर रही है।
शिकायतकर्ता अशाेक नगर माेती बंगला निवासी राजेश व्यास से जमीन मालिक तेजप्रकाश पंड्या ने 22 सितंबर 2016 काे उप पंजीयक कार्यालय में यह रजिस्टर्ड अनुबंध किया कि नागूखेड़ी के सर्वे नंबर 86 पैकी 0.25 हेक्टेयर कृषि भूमि की रजिस्ट्री वे व्यास के पक्ष में कराएंगे। साैदा 10 लाख में हुअा। 8 लाख रुपए पंड्या ने नकद ले लिए, एेसा उन्हाेंने अनुबंध में लिखवाया भी। बाकी रकम 2 लाख रु. 21 दिसंबर 2017 तक देनी थी। जब व्यास 2 लाख रु. देकर रजिस्ट्री करवाने गए ताे पंड्या यह कह कर बहाने बनाते रहे कि परिवार में विवाद चल रहा है। बाद में पता लगा कि इस जमीन पर 17 जून 2016 काे ही काॅलाेनी का अभिन्यास नगर एवं ग्राम निवेश विभाग ने कर दिया था। 4 साल में जिस जमीन का साैदा व्यास से कर रुपए हड़पे थे, उस पर प्लाॅट काट कर दूसरे लाेगाें के पक्ष में रजिस्ट्री हाे गई है। व्यास ने जमीन काे लेकर न्यायालय में प्रकरण लगाया है, उक्त हिस्से में नए साैदे व प्लाॅट विक्रय पर न्यायालय ने स्टे दे रखा है लेकिन पुलिस इस स्टे काे कारण बता कर पिछले डेढ़ साल से धाेखाधड़ी का प्रकरण दर्ज नहीं कर रही है। व्यास का कहना है ब्याज पर पैसे की कहानी पुलिस कार्रवाई से बचने के लिए बनाई जा रही है।
ब्याज के लेनदेन का मामला है
न्यायालय में केस विचाराधीन है। मैं काॅलाेनाइजर नहीं हूं। जमीन तेजप्रकाश पंड्या की है। उनका अाैर राजेश व्यास का कुछ ब्याज के लेनदेन का मामला था।’
संजयसिंह पंवार, विनायक इंटरप्राइजेस (काॅलाेनी काटने वाली फर्म)
धोखाधड़ी का मामला नहीं
मैंने उनसे कुछ पैसा ब्याज पर लिया था। उसके एवज में जमीन की रजिस्ट्री के अनुबंध की लिखा-पढ़ी की थी। ब्याज के पैसाें की बजाय जमीन बेचने का अनुबंध कर लिया था। यह धाेखाधड़ी नहीं है।’
तेजप्रकाश पंड्या, जमीन मालिक
सलाह लेकर केस दर्ज करेंगे
हम ताे ऐसे धाेखेबाजाें काे ढूंढ ही रहे हैं। यदि काेर्ट ने किसी मामले में स्टे दिया है अाैर धाेखाधड़ी के प्रकरण में काेई बाधा नहीं है ताे प्रकरण दर्ज करेंगे।
अनिलसिंह राठाैर, सीएसपी देवास
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