औपचारिकता बना वाहनों का फिटनेस टेस्ट, ले-देकर कर ली जाती है खानापूर्ति
आरटीओ में वाहनों का फिटनेस टेस्ट मात्र औपचारिकता बनकर रह गया है। वाहनों के टेस्ट के दौरान ले-देकर मात्र खानापूर्ति कर ली जाती है। वाहनों के टेस्ट के दौरान आटीओ के बाबू तक मौजूद नहीं रहते हैं। इस कार्य में आॅफिस के इर्द-गिर्द दलाल सक्रिय हैं और बाकायदा दलालों ने ऑफिस के बाहर ऑनलाइन सेंटर भी खोल रखे हैं। इन दलालों द्वारा वाहनों का टेस्ट कराया जाता है। टेस्ट के दाैरान वाहनों की कमी के हिसाब से अतिरिक्त पैसे ले लिए जाते हैं। इसके बाद वाहनों को टेस्ट का सर्टिफिकेट दे दिया जाता है। जानकारी के अनुसार छोटे-बड़े वाहनों के हिसाब से कमीशन सेट होता है। वाहनों की फिटनेस जाँच के लिए सरकारी फीस के अलावा दलालों के माध्यम से कमीशन सेट होता है। फीस और कमीशन मिलने के बाद जितनी कमी वाहन में होती है उसी हिसाब से दलाली की राशि बढ़ जाती है। जो वाहन दलालों के बिना फिटनेस के लिए जाता है तो स्टाफ औपचारिकताओं के नाम पर चक्कर लगवा-लगवा कर परेशान कर देते हैं, लेकिन दलालों के संपर्क में आने के बाद वाहनों का फिटनेस हो जाता है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार परिवहन विभाग द्वारा दो सालों के लिए वाहनों का फिटनेस सर्टिफिकेट दिया जाता है, इसलिए नए वाहनों के साथ पुराने वाहनों का फिटनेस किया जाता है। वाहन मालिकों को फीस के अलावा मोटी रकम दलाली के रूप में ढीली करनी पड़ती है। पी-4
जितना बड़ा वाहन उतनी दलाली
बताया जाता है कि वाहन जितना बड़ा होगा उतनी अधिक राशि वाहन मालिकों को फिटनेस सर्टिफिकेट के लिए खर्च करनी पड़ती है। नेशनल परमिट के साथ ही लोकल स्तर पर चलने वाले वाहनों के लिए अलग-अलग राशि दलाली के रूप में ली जाती है। जानकारी के अनुसार कोरोना काल में लगभग 40 वाहनों का राेज फिटनेस हो रहा है। इसमें करीब 20 वाहन छोटे और करीब 20 वाहन बड़े होते हैं। कोरोना के पहले करीब 70 वाहनों का रोज फिटनेस होता था।
वाहनों की जाँच मोटर व्हीकल एक्ट के प्रावधानों के अनुसार की जाती है। जाँच के बाद ही वाहनों को फिटनेस प्रमाण पत्र दिया जाता है। वाहनों की जाँच के लिए मैकेनाइज्ड सेंटर खोलने का प्रस्ताव मेरे द्वारा दो साल पूर्व भेजा जा चुका है।
- संतोष पॉल, आरटीओ
Download Dainik Bhaskar App to read Latest Hindi News Today
from Dainik Bhaskar https://ift.tt/2XawoVe
via IFTTT
Comments
Post a Comment