मरीज अस्पताल से घर पहुंचे, माता-पिता अब भी इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन

जिले में कोरोना के मरीज अपनी बीमारी से उतना परेशान नहीं होते जितना प्रशासन द्वारा उनके परिवार को परेशान किए जाने से हो जाते हैं। भास्कर परिवार के सदस्य के साथ भी ऐसा ही किया। उनके मेडिकल में भर्ती होते ही माता-पिता को बीड़ी अस्पताल में क्वॉरेंटाइन कर दिया गया, जबकि उनके साथ भर्ती मरीजों के परिजन अपने-अपने घर पर ही हैं। माता-पिता हाई बीपी के मरीज हैं और पिता का कुछ साल पहले हार्ट का ऑपरेशन भी हो चुका है। ये बात सारे अफसरों को बताई लेकिन किसी ने ध्यान नहीं दिया। मरीज तो 10 दिन पूरे होने पर घर पहुंच गए लेकिन उनके माता-पिता को अब भी घर नहीं भेजा गया, ऐसे में वे
अगर बीमार पड़ते हैं तो जिम्मेदारी किसकी होगी।
इस मामले में कलेक्टर दीपक सिंह का कहना है कि इंस्टीट्यूशनल क्वारेंटाइन केवल उन्ही लोगों को किया जाता है। जिनके पास जगह नहीं है। फिर भी अगर किसी
मरीज के परिजन को दुर्भावना पूर्ण तरीके से क्वारेंटाइन किया तो उस पर कार्रवाई होगी।



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