एमपी के सीहोर जिले हिरानी गांव डूबा; घर, फसल सब बर्बाद, बचा-खुचा सामान समेट रहे लोग, खाने-पीने के लिए कुछ नहीं बचा; बरेली में 600 लोगों को सुरक्षित निकाला

सीहोर जिले के शाहगंज के पास बाढ़ में डूबा हिरानी गांव। केवट मोहल्ले के लोग अपने घरों की टूटी दीवारों को बेबस देख रहे हैं। घर का पूरा सामान बह चुका है। फसल भी बर्बाद हो गई। भास्कर संवाददाता सुधीर निगम और फोटो जर्नलिस्ट शान बहादुर की रिपोर्ट-

एक हजार से ज्यादा आबादी वाले हिरानी पहुंचते ही हमें गांव के रामकुमार मीणा मिले। वे हमें साथ लेकर अपने गांव का मुआयना करवाने लगे। गाड़ी में बैठे-बैठे ही उन्होंने बताया कि उनकी धान और तुअर की पूरी फसल पानी में बर्बाद हो गई। अब भी उनके खेत में पानी भरा है। 10 एकड़ और 6 एकड़ के दो हिस्सों में फसल को पानी ने खत्म कर दिया।
बातचीत करते हुए हम एक चौपाल पर पहुंचे, तो वहां बैठे लोग भी बाढ़ के नुकसान की ही बात कर रहे थे। उन्होंने बताया कि अब तक उनके पास प्रशासन की ओर से कोई नहीं आया। गाड़ी वहीं छोड़कर पैदल कीचड़ भरे रास्ते से केवट मोहल्ले में पहुंचे। यहां सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। वहां से कई लोग हमारे साथ-साथ हो लिए। मोहल्ले में पहुंचते ही और भी लोग इकट्‌ठा हो गए थे। हमे प्रशासन के अफसर समझ एक-एक करके सबने अपना दुखड़ा सुनाना शुरू कर दिया। सबकी पीड़ा एक ही थी, ‘फसल बर्बाद हो गई, घर डूब गए और खाने-पीने के लिए कुछ नहीं बचा।’

घर टूट गया, दूसरों के घरों में आसरा

बृजमोहन का घर भी बाढ़ में टूट गया। अब वे अपनी पत्नी और बच्चों के साथ गांव में ही दूसरे व्यक्ति के घर आसरा लिए हैं। वे कहते हैं कि पता नहीं अब घर बनाने में कितना समय लगेगा। संतोष और जगदीश केवट दोनों भाई अगल-बगल में रहते हैं। जिनके मकान की दीवार टूट गई और सामान भी बह गया। संतोष ने बताया कि अब तक यहां कोई भी सरकारी आदमी नहीं आया। घर के साथ सामान भी बर्बाद हुआ है।
सोमलवाड़ा से 193 लोगों को रेस्क्यू किया

बाढ़ में चारों तरफ से घिरे सोमलवाड़ा में सुबह से ही रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू हो गया था। यहां से 193 लोगों को हेलीकॉप्टर से रेस्क्यू किया गया। कलेक्टर अजय गुप्ता ने बताया कि चार घंटे में सभी को वहां से निकाल लिया गया। सोमलवाड़ा व अन्य जगह से रेस्क्यू किए गए लोगों को शाहगंज के 8 राहत शिविरों में ठहराया गया है। सभी को सरकारी कॉलेज में रुकवाया गया है।

तीन दिन से फंसे थे, सेना ने बचाया
रामसेवक ने बताया कि तीन दिन से फंसे थे। हेलीकॉप्टर से निकाला। सेना के लोगों ने बहुत अच्छा काम किया। वहीं, रजनी शर्मा का कहना था कि हमारी 45 एकड़ खेती डूब गई, घर का सामान खराब हो गया। पानी उतरेगा उसके बाद मालूम पड़ेगा कितना नुकसान हुआ।
बांद्राभान का रास्ता बंद
शाहगंज से बांद्राभान की ओर जाने वाले रास्ते पानी के कारण गाड़ियां निकलना मुश्किल था। इसके बावजूद कई लोग बाइक लेकर उसे पार कर रहे थे। बाइक में ही वे अपना भी सामान लादे हुए थे। उनसे पूछा कि रिस्क क्यों ले रहे हैं, तो वे बात करने से कतराने लगे।

घर टूटे, हौसला नहीं...

शाहगंज के हिरानी में दिनेश और मीराबाई केवट के घर का एक हिस्सा अब भी बाढ़ के पानी में डूबा है। छत पर बैठे लोग नुकसान की बात कर रहे हैं। इसी दौरान एक छोटी बच्ची अपने भाई को पीठ पर लादकर ऊपर पहुंचती है। दिनेश की बहन का कहना है कि बाढ़ में बहुत सामान बह गया। किसी तरह मवेशियों को बचाया। अब घर की मरम्मत में जुटेंगे।

पुलिस ने गर्भवती को अस्पताल पहुंचाया

उज्जैन।

उज्जैन जिले के कायथा गांव में दीपक राजोरिया की पत्नी को प्रसव पीड़ा होने पर हॉस्पिटल ले जाना था, लेकिन कालीसिंध नदी में उफान होने से रास्ता बंद था। दीपक ने पुलिस से मदद मांगी। टीआई प्रदीप राजपूत ने तुरंत थाने के जवान गांव भिजवाए। महिला को खटिया पर बैठाकर नदी पार करवाई और एम्बुलेंस से उज्जैन भिजवाया।

शिप्रा में दूसरी बार उफान, मंदिर आधे से ज्यादा डूबे

उज्जैन

उज्जैन में 4 से अधिक बारिश हुई। एक सप्ताह में दूसरी बार शिप्रा नदी उफान पर आ गई और शिप्रा नदी के किनारे मंदिर आधे से ज्यादा डूब गए। पानी बड़े पुल से मात्र तीन फीट नीचे तक बहता रहा। रात में शिप्रा नदी का जलस्तर भी तेजी से बढ़ा। इस कारण आधी रात को दानीगेट, गणगौर दरवाजा सहित आसपास के क्षेत्रों के लोगों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया। सुबह होते-होते नदी का पानी बड़े पुल की ओर तेजी से बढ़ा।

थाने में पानी घुसा

नेमावर

नेमावर में नर्मदा का जलस्तर 905 मीटर पर पहुंचा। यह खतरे के निशान से 20 फीट ऊपर है। नर्मदा तट से डेढ़ किलोमीटर दूर तक पानी ही पानी है। हालांकि यह पानी जामनेर नदी का है। नेमावर के थाना भवन में भी पानी घुस गया। एक दिन पहले ही 700 लोगों को सुरक्षित स्थान पर पहुंचा दिया था।

नाव फंसी तो जवान ने रस्सी से खींचा

होशंगाबाद।

होशंगाबाद से 8 किमी दूर जासलपुर टील में एक ही परिवार के करीब 13 लाेगाें काे एनडीआरफ और हाेमगार्ड की टीम ने रेस्क्यू कर निकाला। यह लाेग शनिवार रात में बाढ़ में फंसे थे। रविवार सुबह चाराें ओर करीब 10 फीट तक पानी भरा हुआ था। छत पर ही रात गुजारी थी।

पहली बार गांधी सागर के गेट खुले

गांधी सागर बांध।

रविवार शाम तक प्रशासन ने गांधीसागर बांध का 1306.13 फीट का लेवल मेंटेन किया। रात 8 बजे प्रशासन ने 7 बड़े व 10 छोटे गेट खोल दिए। इस समय भी बांध में 4 लाख क्यूसेक पानी की आवक बनी हुई थी व प्रशासन ढाई लाख क्यूसेक पानी छोड़ रहा था।

सुलगांव का प्राइमरी स्कूल जलमग्न

प्राइमरी स्कूल परिसर

खरगोन जिले के सुलगांव में नर्मदा की बाढ़ से गांव का प्राइमरी स्कूल, धार्मिक स्थल व रहवासी क्षेत्र जलमग्न हो गए। जलस्तर अधिक बढ़ने के कारण निचली बस्ती मानकर मोहल्ले को रात में खाली कराया। रात 11 बजे श्रीराम मंदिर चौक तक बाढ़ का पानी पहुंच गया।

भोपाल-होशंगाबाद रोड पर ब्रिज से 15 फीट नीचे बह रही नर्मदा

बुदनी

भोपाल-होशंगबाद रोड पर नर्मदा पर बने ये चारों ब्रिज 50 फीट से ऊंचे हैं। रविवार को इन पुलों से नर्मदा 15 फीट बह रही थी। नर्मदा पर बने 4 ओवर ब्रिज में से 3 रेलवे के ब्रिज हैं। चाैथा ब्रिज सड़क मार्ग का है। इसमें सबसे पुराना रेलवे ब्रिज 1884 में, दूसरा 1968 में, तीसरा 2019 में बनकर तैयार हुआ है। 1968 में सड़क मार्ग के लिए ब्रिज बनाया गया। रेल ब्रिज से एक दिन में करीब 150 ट्रेनें निकलती हैं। सड़क ब्रिज से हाेकर 35 हजार से अधिक वाहन निकलते हैं।

बरेेली में तीन दिन में 600 लोगों को सुरक्षित निकाला

(बरेली से सुनीत सक्सेना) बारिश के पानी से रायसेन की बरेली तहसील के हालात खराब हैं। मकान एक- एक मंजिल तक पानी में डूब गए। लोगों को रेस्क्यू कर आंगनबाड़ी, पिछले 3 दिन में 600 से ज्यादा लोगों को रेस्क्यू करके सुरक्षित स्थानों में पहुंचाया गया है। नेशनल हाईवे 12 पिछले 3 दिन से बंद है, उसका भोपाल और जबलपुर के बीच संपर्क टूटा हुआ है। कारण, भोपाल और जबलपुर को जोड़ने वाली बरेली पुलिया पर बारना नदी का पानी लगभग 30 फीट ऊपर बह रहा है।
यह हालात हाइवे पर निर्माणाधीन पुल के कारण निर्मित हुए हैं। बरेली में बारना नदी और बरगी डैम का पानी आ कर जमा हो रहा है।

एसडीईआएफ रायसेन की रेस्क्यू टीम के सदस्य पवन कुमार कहते हैं कि घरों में फंसे लोगों को निकालकर आंगनबाड़ी, स्कूल एवं अन्य स्थानों पर रखा गया है। कसाई मोहल्ला, हाली मोहल्ला आदि से 90 लोगों को सुरक्षित निकाला, जिसमें एक गर्भवती महिला भी थी। इसके अलावा धनासरी गांव में फंसे बुजुर्ग और महिला जो मरने की स्थिति में थे, उनको बचाया। सुल्तानपुर खेड़ा गांव से 15 लोगों को रेस्क्यू किया।
बरेली में लोगों की घर गृहस्थी का सामान बर्बाद हो चुका है। एक-एक मंजिल तक मकान डूबे हुए हैं। यह स्थिति सात-आठ गांव की है। मंगरोलिया गांव में कार पानी में फंसने से एक व्यक्ति खत्म हो गए। उनको कार से बाहर निकाल कर लाए।

निर्माणाधीन पुल ने बदली नदी की दिशा
बरेली से दो किलोमीटर पहले पड़ने वाले धना श्री गांव के अमर सिंह पटेल कहते हैं कि बरेली पुलिया पर 1999 में पानी भरा था। लेकिन अब पिछले दो साल से लगातार पानी भर रहा है। उनका कहना है कि बारना नदी का पानी पहले सीधे निकल जाता था, लेकिन नेशनल हाइवे 12 पर बन रहे पुल के कारण अब पानी को यू टर्न लेकर जाना पड़ रहा है। नदी का रास्ता पुल की दीवार ने बदल दिया है। जिस कारण बरेली में पानी भरा है। दो दिन से बरेली पुलिया पर लगभग 50 फीट पानी ऊपर था जो अब धीरे धीरे उतर रहा है।
पूरा पानी उतरने में 24 घंटे का समय लगेगा। कोटवार का कहना है कि बारना और बरगी का पानी गांव के कुछ घरों में घुस गया था। लोगों गांव के ही अन्य घरों में ठहरा दिया था। गांव का पानी उतर चुका है। बरेली में पानी पहली बार देखा है।



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यह मार्मिक तस्वीर सीहोर के शाहगंज की है। यहां छोटी बच्ची अपने भाई को पीठ पर लादकर ऊपर पहुंचती हुई।


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