बिना बिक्री अनुबंध और किराया तय किए दाे दुकानदाराें काे दे दिया दुकानों पर कब्जा

कृषि उपज मंडी के पूर्व मंडी सचिवों के कार्यकाल की जांच करने मंडी बोर्ड से अभी भले ही दल का गठन नहीं हुआ है, लेकिन मंडी प्रशासन की जांच में पूर्व सचिवों के नियम विरुद्ध कार्यों के खुलासे होने लगे हैं। ऐसा ही एक मामला मंडी के स्वामित्व की दुकानों के आवंटन प्रक्रिया को लेकर हुआ है। मंडी की मेन रोड पर 88 दुकानें बनी हैं। इनमें से 86 दुकानें साल 2005 में नीलाम की गईं, जबकि 2 दुकानों की नीलामी 2015 में की गई। इन 2 दुकानों की नीलामी 3 मार्च 2015 को की गई थी।

इसमें दुकान क्रमांक 78 देवेंद्र पिता मिश्रीलाल राजपूत और दुकान क्रमांक 85 अनीता पति कैलाश जैन ने नीलामी में प्राप्त की। इसमें देवेंद्र ने 7 लाख 92 हजार रुपए और अनीता जैन ने 7 लाख 87 हजार रुपए में दुकान नीलामी में खरीदी। दोनों खरीददारों ने 61-61 हजार रुपए मौके पर नकद जमा किए। शेष राशि चेक के माध्यम से मंडी प्रशासन काे 20 मई 2015 को दिए। इसके बाद तत्कालीन मंडी सचिव बीके राजपूत और शाखा प्रभारी केके उमरिया ने दोनों दुकानदारों को दुकान का कब्जा ताे दे दिया, लेकिन बिक्री का न कोई अनुबंध किया न ही मासिक किराया निर्धारित किया। ऐसे में दोनों दुकानें अभी तक बगैर किराए के चल रही हैं। 5 सालों में मंडी प्रशासन को लाखों रुपए के राजस्व की हानि हुई है।


फाइल पर नजर नहीं दौड़ाई
तत्कालीन सचिव राजपूत दाेनाें दुकानों की नीलामी के एक साल बाद तक पदस्थ रहे। दिलचस्प तथ्य यह है कि 2015 के बाद मंडी में पदस्थ हुए 4 सचिवों ने भी दुकानों की नीलामी की प्रक्रिया की फाइल पर नजर तक नहीं मंडी के प्रशासक व एसडीएम श्यामेंद्र जायसवाल ने दुकानों की नीलामी और किराया को लेकर मंडी सचिव आरपी नैन को निर्देश जारी किए। मंडी सचिव नैन ने जब नीलामी की फाइल की जांच की तो इन 2 दुकानों के बगैर अनुबंध और बगैर किसी किराया के आवंटित रहने का खुलासा हुआ। इसके बाद उन्हाेंने दोनों दुकानदारों को नोटिस देकर दस्तावेजों के साथ तलब किया है। मालूम हाे, कृषि मंत्री कमल पटेल के निर्देश पर मंडी बाेर्ड से दल गठित हाेना था।
भारसाधक अधिकारी श्यामेंद्र जायसवाल ने बताया मंडी समिति के स्वामित्व की दुकानों की नीलामी और किराया की जानकारी सचिव से मांगी है। नियम विरुद्ध दुकानों का आवंटन होने पर संबंधित अधिकारियाें व दुकानदारों पर कार्रवाई करेंगे।

कई बिंदुओं पर जांच कर रहा मंडी दल
मंडी दल की जांच में यह भी खुलासा हुआ है कि जिस व्यक्ति ने नीलामी में दुकान ली, उसने दूसरे को दुकान किराए से देने और बेचने की प्रक्रिया भी पूरी कर दी। मंडी प्रशासन को भनक तक नहीं लगी। मंडी के लेखापाल विमलेश उइके, सहायक उप निरीक्षक संतोष सिंह, गजेंद्र महाजन और रामशंकर बांके, भृत्य भूपेंद्र सिंह, मंडी कर्मी आनंद जाट, चेतन डाले, रोहित भाटी दुकानों का सत्यापन करने में जुटे हुए हैं। दल सभी 86 दुकानों का सत्यापन करेगा, जिसमें दुकान किसे नीलामी में दी गई, अभी कब्जा किसका है, कितना किराया वसूला जा रहा है जैसे कई बिंदुओं पर जांच की जा रही है। नीलामी के नियम में यह शामिल था कि संबंधित दुकानदार जिसे दुकान आवंटित हुई है, वह किसी अन्य को न दुकान किराए पर दे सकता है और न ही उसे बेच सकता है। ऐसे में नियम विरुद्ध काम करने के चलते दुकानदारों पर पुलिस प्रकरण दर्ज करने की तैयारी भी चल रही है।

नाम मात्र तय था किराया
दुकानों के आवंटन के बाद दुकानदारों से किराया की वसूली करने में भी अधिकारियाें ने ध्यान नहीं दिया है। दुकानों का नाममात्र का किराया तय है। फिर भी कई दुकानदारों ने 28 माह, 50 माह, 18 माह, 24 माह का किराया ही मंडी में जमा नहीं किया है। अब ऐसे दुकानदारों को भी मंडी प्रशासन ने नोटिस जारी किए हैं, जिससे उनसे महीनों से बकाया किराया राशि की वसूली हो सके।

मंडी की 88 दुकानों का सत्यापन करने में जांच दल जुटा है। प्रारंभिक जांच में 2 दुकानों का अभी तक अनुबंध न होने और किराया निर्धारित नहीं होने का खुलासा हुआ है। तत्कालीन मंडी सचिव और स्टाफ इनमें दोषी है। इनके बारे में वरिष्ठ अधिकारियाें से पत्राचार कर रहे हैं। कई दुकानों का महीनों से किराया भी नहीं वसूला गया। दुकानदारों को नोटिस जारी किए हैं। नियम विरुद्ध दुकान दूसरे को बेचने या किराए से देने वाले दुकानदारों पर एफआईआर दर्ज कराएंगे।
आरपीएस नैन, सचिव, कृषि उपज मंडी खिरकिया



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Shopkeepers occupied shops without fixing sales contract and rent


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