नया अस्पताल: शहर के इस प्रोजेक्ट के लिए फंड की कमी, अब 3 महीने देरी से होगा पूरा

47 करोड़ रुपए की लागत का नया अस्पताल भवन तीन मंजिला बनकर तैयार है। निर्माणाधीन बिल्डिंग में लिफ्ट लगाने से लेकर ऑपेरशन थिएटर तैयार करने व सीवर ट्रीटमेंट प्लांट के निर्माण के लिए ठेकेदार को राज्य शासन से 20 करोड़ की फंडिंग नहीं हो पा रही है। इस हाल में अब यह प्रोजेक्ट 31 जनवरी 2021 को पूरा होने की स्थिति में नहीं है। बजट संकट के कारण शहर का यह ड्रीम प्रोजेक्ट तीन से चार महीने लेट हो सकता है।

जिला अस्पताल के पीछे 2 लाख हैक्टेयर क्षेत्रफल में 300 बेड की मेटरिनटी का नया भवन तीन मंजिल तक बनाकर तैयार कर दिया है। हाउसिंग बोर्ड नवनिर्मित भवन के ग्राउंड फ्लोर से लेकर फर्स्ट फ्लोर के चार वार्डों को कोविड-19 के मरीजों के लिए हैंडओवर कर चुका है। प्रैगमेटिक कंस्ट्रक्शन कंपनी का प्रयास है कि प्राेजेक्ट को 31 जनवरी 2021 तक पूरा कर स्वास्थ्य विभाग के हैडओवर कर दिया जाए। लेकिन बजट संकट के कारण इस ड्रीम व मेगा प्रोजेक्ट को मूर्तरूप देने का काम अप्रैल-मई में पूरा हो पाएगा।

बजह स्पष्ट है कि जिला अस्पताल की नई बिल्डिंग के शेष निर्माण कार्यों को पूरा करने के लिए राज्य शासन के स्वास्थ्य विभाग से फंडिंग रोक दी गई है । खबर है कि अभी तक 25 करोड़ रुपए की राशि राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन से जारी की गई थी। अब 20 करोड़ से अधिक का भुगतान राज्य शासन को अपने खजाने से करना है। उपचुनाव के कारण सरकार ने प्रोजेक्ट वर्क के भुगतान रोक दिए हैं। इसका असर मुरैना के अस्पताल प्रोजेक्ट पर भी देखने को मिला है।

निर्माण के बीच से बदले अधिकारी
हाउसिंग बोर्ड के नए कमिश्नर भरत यादव ने विभागीय मंत्री के दबाव में 300 बेड की मेटरनिटी के निर्माण कार्य की मॉनीटरिंग में लगे सहायक यंत्री कौशलेन्द्र चतुर्वेदी को मुरैना से ग्वालियर ट्रांसफर कर दिया है। उनके स्थान पर अशोक नगर से मंत्री ने सजातीय सहायक यंत्री शिवनंदन भदौरिया माढैन को मुरैना पदस्थ करा दिया है। इस संबंध में पूर्व स्वास्थ्य मंत्री रुस्तम सिंह ने भरत यादव का ध्यानाकर्षण करते हुए एई चतुर्वेदी को प्रोजेक्ट कंपलीट होने तक मुरैना में पदस्थ रखने की बात कही लेकिन कमिश्नर भरत यादव ने विभागीय मंत्री के आदेश का हवाला देते हुए रुस्तम सिंह के सुझाव को तबज्जो नहीं दी। फेरबदल का असर निर्माण कार्य की गति पर देखने को मिल रहा है। इधर बजंट की कमी उधर अफसर का तबादला होने से 15 दिन से अस्पताल की निर्माणाधीन बिल्डिंग में काम की गति थम सी गई है। क्योंकि एई चतुर्वेदी ने इस प्रोजेक्ट में बुनियाद से लेकर तीसरी मंजिल खड़ी कराए जाने तक साइट पर मौजूद रहकर काम कराया है।

सीएम आए लेकिन विशेषज्ञों पर चर्चा नहीं की
मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चाैहान तीन दिन पहले पूर्व मंत्री रूस्तम सिंह के निवास पर डिनर के लिए पहुंचे थे। लेकिन सीएम की आवभगत के बीच से समय निकालकर रुस्तम सिंह ने अपने ड्रीम प्रोजेक्ट के लिए सीएम से 10 से 15 विशेषज्ञ डॉक्टरों की डिमांड उनके सामने नहीं रखी। विडंबना है कि रुस्तम सिंह के अलावा जिले में कोई भी ऐेसा लीडर नहीं है जो 600 बेड के जिला अस्पताल के कायाकल्प के संबंध में जानकारी रखता हो और अपनी बात को सरकार तक पहुंचा सके। लेकिन रुस्तम सिंह ने हाथ आए मौके को चूकवश छोड़ दिया।

स्वीकृति के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया है
जिला अस्पताल की निर्माणाधीन बिल्डिंग के लिए एनएचएम से बजट की मांग की गई तो डायरेक्टर का कहना था कि बजट तो कोरोना में खर्च हो गया। फिलहाल इस प्रोजेक्ट के लिए बजट की व्यवस्था नहीं है। मुरैना का प्रस्ताव स्वीकृति के लिए वित्त विभाग को भेज दिया गया है।
नीरू राजपूत, कार्यपालन यंत्री हाउसिंग बोर्ड



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जिला अस्पताल की निर्माणाधीन बिल्डिंग का काम बजट के कारण बंद हो गया है।


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