12 साल बाद भी ओंकारेश्वर की नहरों में नहीं आया पानी, किसान रबी फसलों की बुआई नहीं कर पा रहे

ओंकारेश्वर परियोजना की नहरों में पानी छोड़ने का कमांड एरिया के किसान इंतजार कर रहे हैं। क्षेत्र की भूमि अधिग्रहण कर लेने के 12 साल बाद भी पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। रबी सीजन बीत रहा है। हरसाल जूझना पड़ता है। किसानों का कहना है क्षेत्र के जनप्रतिनिधियों को समस्या से अवगत करा चुके हैं।

सनावद से कसरावद तक प्रथम चरण में निर्माण हुई ओंकारेश्वर नहर परियोजना नहर में पानी नहीं होने से किसान रबी फसलों की बुवाई नहीं कर पा रहे हैं। किसानों का कहना है कि जिम्मेदारी विभाग के अधिकतर अधिकारी इंदौर निवास करते हैं वहीं से मानीटरिंग कर रहे हैं। सांसद एवं पूर्व कृषि मंत्री को आश्वासन मिला लेकिन अभी तक नहरों में पानी नहीं छोड़ा गया। याचिकाकर्ता वीरेंद्र पावटेवाला ने बताया याचिका पर माननीय न्यायालय ने नर्मदा घाटी विकास विभाग को आदेश जारी किए थे। किसानों को विभाग के अधिकारी कर्मचारी समस्याएं बताते रहे 2 साल पहले नगर तक पानी आया था।
इसके बाद जगह-जगह से टूट-फूट होने के डर से पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। अब दोबारा न्यायालय की शरण में जाएंगे। घटिया निर्माण की नहरों की स्थिति यह है कि जगह जगह से लीकेज एवं सीपेजिंग हो रही है। प्रेशन होने से पानी आगे तक नहीं पहुंच पा रहा है। उन्होंने चेतावनी दी है कि हाई कोर्ट की शरण लेंगे। इधर, 1 सप्ताह में नहरों में पानी छोड़ने का विभाग आश्वासन दे रहा है।

ग्राउंड रिपोर्ट : मिर्जापुर, डोंगरगांव व कसराड में लीकेज

  • कसरावद एवं डोंगरगांव क्षेत्र के किसान खेतों में पानी पहुंचने की राह देख रहे हैं। घटिया काम हुआ है। काम की कलई खुल रही है।
  • नगर से 7 किलोमीटर दूर मिर्जापुर गांव के पास नहर क्षतिग्रस्त हुई है यहां पानी नदियों में बह रहा है किसानों ने कहा किसानों के हितों के लिए निर्माण की गई नहर 12 साल के बाद भी अनुपयोगी साबित हो रही है।
  • कसराड क्षेत्र में भी लीकेज हो रहा है। यहां लंबे समय से यह स्थिति बनी हुई है।

इंदौर से मॉनीटरिंग करते हैं एनवीडीए अफसर, लेवल खराब होने से पानी नहीं पहुंच पा रहा
किसान गजानन बर्डे, ओम हार्डिया ने बताया कमांड एरिया में शामिल किसानों को सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराना मुख्य रूप से विभाग की प्राथमिकता थी, लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। कई किसान ऐसे हैं जो नर्मदा से पाइप लाइन डालकर सिंचाई नहीं कर पाते हैं। ओंकारेश्वर नहर में पानी पहुंचेगा तो फसलें तैयार कर पाएंगे। इसके अलावा जगह जगह से लीकेज व क्षतिग्रस्त नहर को को देखने वाला कोई नहीं है। किसानों का कहना है नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग योजना से जुड़े तमाम अधिकारी कर्मचारी इंदौर में रहते हैं। वे काम की इंदौर से मानिटरिंग करते हैं। जगह-जगह लेवल खराब होने से पानी नहीं पहुंच पा रहा है। नहर के किसानों की संस्था की नियमित बैठक भी नहीं होती।

लेटलतीफ : 2006 से 2008 तक काम पूरा होना था काम
नहर का काम शुरुआत से विवाद में घिरा हुआ है। पहले चरण में 128 गांवों की 24000 हेक्टेयर कृषि भूमि में सिंचाई प्रस्तावित है। 2008 तक काम पूरा हो जाना था। लेटलतीफी के कारण किसानों को हाई कोर्ट की शरण लेना पड़ी थी। न्यायालय ने 2014 में काम पूरा करने के निर्देश दिए थे। आदेश के 6 साल बाद भी किसानों को पानी देना तो दूर निर्माण हुई नहरों का सफाई भी नहीं हो रही है। नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण विभाग की सुस्ती के चलते हुए नहर निर्माण में तेजी नहीं आई।

2 दिन में नहर में पहुंचेगा पानी
2 दिन के भीतर नहर में पानी पहुंचेगा। विभाग के टेक्निकल सब इंजीनियर व कर्मचारियों की ड्यूटी लगा दी गई है। नहर व्यवस्थित की जा रही है। स्वयं व उच्च अधिकारी मानिटरिंग कर रहे हैं। कसरावद से पूर्व अधिकांश किसान नहर से साईफन पद्धति से पानी ले रहे हैं। अधिक प्रेशर से पानी छोड़ने कारण समस्या उत्पन्न हो गई है। इसलिए कुछ स्थानों पर नहर क्षतिग्रस्त होने की स्थिति बन रही है।
- जितेंद्र सिंह राणावत, एई. नर्मदा घाटी विकास प्राधिकरण



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मिर्जापुर के पास नदी में बह रहा है नहर का पानी।


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