माता-पिता से 46 बच्चों को एड्स, 23 रोगमुक्त, 20 का है इलाज जारी
जिले में एचआईवी एड्स के मरीज बढ़ रहे हैं, लेकिन दवाईयों के सहारे वह स्वस्थ्य हो रहे हैं। 46 एचआईवी एड्स पीड़ित माता-पिता के नवजात बच्चें बीमारी से मुक्त हुए हैं। अब वह स्वस्थ्य है। उन्हें सर्टिफिकेट भी मिल चुका है। जबकि 20 बच्चों का इलाज चल रहा है।
माता-पिता की गलतियों की सजा नवजात को मिल रही है। जिले में पिछले सालों में 46 एचआईवी एड्स नवजातों का जन्म हुआ है। गर्भवती महिला की जांच में वह पॉजिटिव निकलने के बाद नवजात का इलाज भी शुरू हो जाता है। जन्म के बाद से ही नवजात को दवाइयां दी जाती है। दवाईयों के बीच 10 से ज्यादा जांचों के बाद 18 माह की लगातार निगरानी में नवजात स्वस्थ्य हुए हैं। इन बच्चों को सर्टिफिकेट भी मिला है। इसके अलावा 20 बच्चों का इलाज जारी है। दो नवजात के माता-पिता दूसरे जिले चले गए हैं। इसके चलते उनका इलाज नहीं हो पाया है। जबकि एक नवजात व उसकी मां की मौत हुई है। काउंसलर महेश चौहान, विनोद पटेल ने बताया कि जिले में खरगोन, बड़वाह, सनावद, कसरावद, भीकनगांव व भगवानपुरा में केंद्र संचालित है।
पुरुष ज्यादा संक्रमित
जिले में पुरुष सबसे लापरवाह है। छह सालों में सबसे ज्यादा पुरुष एचआईवी एड्स से ग्रसित हुए हैं। इसमें सुरक्षित साधनों का उपयोग किए बिना सेक्स करने से बीमारी हुई है। जबकि महिलाओं की संख्या कम है।
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