4 दिन में सिर्फ 14 पॉजिटिव, 8 महीने बाद हुआ ऐसा क्योंकि जांच के लिए किट हो गई थी खत्म
लंबे समय बाद मेडिकल कॉलेज में एक बार फिर किट की परेशानी खड़ी हो गई है। 4 दिन में सिर्फ 14 पॉजिटिव ही मिले हैं, ऐसा 8 महीने बाद हुआ है। शनिवार को सिर्फ एक व्यक्ति की ही रिपोर्ट पॉजिटिव आई। जिम्मेदारों की मानें तो पर्याप्त मात्रा में किट आने में 2 से 3 दिन का समय लग सकता है।
जिले में अभी रैपिड एंटीजन टेस्ट किट से ही जांच हो रही है। 6 जनवरी को 7, 7 जनवरी को 4 तो 8 जनवरी को सिर्फ दो पॉजिटिव ही सामने आ सके थे। शनिवार को वेद व्यास कॉलोनी निवासी एक व्यक्ति ही संक्रमित मिला। शनिवार देर शाम कॉलेज को 1 हजार किट मिली। लेकिन यह संख्या बहुत कम है, ऐसा इसलिए क्योंकि जिले में 707 सैंपल अभी पेंडिंग ही पड़े हैं। मेडिकल कॉलेज में मंदसौर व नीमच के सैंपल की भी जांच की जाती है। जांच रुक जाने के कारण वहां भी संक्रमितों की संख्या पर असर पड़ा है।
शनिवार को महज एक ही रिपोर्ट पॉजिटिव मिली, सैंपल नहीं लगने से यह स्थिति बनी
अप्रैल-मई में मिल रहे थे इतने कम संक्रमित
जिले में अभी जो संक्रमितों की संख्या है। ऐसी संख्या अप्रैल-मई में सामने आ रही थी। इधर, सैंपल नहीं लग पा रहे हैं, ऐसे में मरीजों के सैंपल लेना भी कम कर दिए हैं। 7 जनवरी को 169 तो 8 जनवरी को 250 लोगों के ही सैंपल लिए थे। जबकि सैंपलिंग का आंकड़ा 500 से ज्यादा रहता है।
स्विट्जरलैंड के युवक की नहीं आई रिपोर्ट
शनिवार को भी स्विटजरलैंड के युवक की रिपोर्ट नहीं मिली। युवक का सैंपल दो दिन पहले उज्जैन भेजा गया था। यह युवक 3 जनवरी को स्विट्जरलैंड से रतलाम आया था। स्विट्जरलैंड में युवक की रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी जबकि बेंगलुरू में वह निगेटिव
निकला था।
पहले भी आ चुकी परेशानी
{14 जून को किट की प्रोसेसिंग कमजोर हो गई थी। इससे 526 सैंपल पेंडिंग हो गए थे। नई की आने के बाद ही प्रक्रिया आगे बढ़ सकी थी।
{ पहले ट्रू-नोट मशीन से जांच की जा रही थी। लेकिन, 1 अक्टूबर से यह प्रक्रिया भी बंद हो गई। इस मशीन से 1624 लोगों की जांच की गई थी। 132 पॉजिटिव मिले थे।
{ जून महीने में भी मेडिकल कॉलेज में किट खत्म होने का मामला सामने आया था।
एक-दो दिन में अन्य किट भी मिल जाएगी
^पुरानी किट के परिणाम में गफलत आने पर किट बदली गई है। आगे से नई किट भेजी जा रही है। शनिवार शाम तक एक हजार किट मिली। इससे जांच प्रक्रिया शुरू होगी। एक-दो दिन में अन्य किट भी मिलेगी।
डॉ. शशि गांधी, डीन, मेडिकल कॉलेज-रतलाम
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