नाव में सवार जितेंद्र ने कहा था- ढोल बंद नहीं होना चाहिए...
मोरटक्का के खेड़ीघाट स्थित नावघाट पर नर्मदा नदी में नाव पलटने की घटना के 48 घंटे बाद लापता जितेंद्र पिता किशोलीलाल वर्मा (40) का शव नर्मदा तट स्थित सेमरला के पास मिला। परिजन को जानकारी मिलते ही जितेंद्र के सकुशल होने की उनकी अंतिम उम्मीद भी टूट गई। बड़ा भाई जुगल वर्मा घटना के बाद से घर तक नहीं गया था। वह दिन-रात नर्मदा के तटों पर घूमकर भाई के मिलने की उम्मीद लगाकर बैठा था। हादसे में बची पत्नी नमिता को भी घर वालों ने जितेंद्र के लापता होने की जानकारी नहीं दी थी। उन्हें निजी अस्पताल में उपचार होना बताया था, लेकिन जब शव घर पहुंचा तो वह बेसुध हो गई।
परिजन ने बताया धार्मिक व समाजसेवी प्रवृत्ति का जितेंद्र घटना के पूर्व चुनरी चढ़ाने को लेकर बड़ा उत्साहित था। जब वह घाट पहुंचा तो ढोल बजना बंद हो गए थे, लेकिन उसने कहा मेरे आने पर ढोल क्यों बंद किए फिर से बजाओ। इस पर वह ढोलक की थाप पर बहुत थिरका। नाव में बैठते समय भी नर्मदे हर के घोष लगाते हुए एक हाथ में चुनरी और एक हाथ हवा में उठाकर बेहद खुश नजर आ रहा था। शव का अंतिम संस्कार नावघाट खेड़ी स्थित नर्मदा तट के श्मशान घाट पर किया। जितेंद्र की एमजी रोड पर फुटवेयर की शॉप थी। उसकी दो बालिका रुचिका व कनिष्का है। घटना को लेकर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी ट्विट कर दुःख जताया है।
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